Saand Ki Aankh Movie review hindi

Saand Ki Aankh Movie review: कैसी है तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर की नई मूवी सांड की आँख 


सांड कि आँख दमदार कहानी है, तोमर दादियो कि कहानी है सांढ़ कि आँख हिम्मत ओर जुनुन कि कहनी है। कोण है तोमर दादिया ये तो आप जानते ही होंगे और नहीं जानते तो में अभी बता देता हूँ  हरयाणा की रहने वाली 2 महिलाये है। तोमर दादी चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर एक छोटे से गाँव में रहने वाली 2 महिला कैसे शूटर बनती है और पोतियों  को भी बनाती है। जब की वो ऐसे गाँव ऐसे माहौल में रहती है जहा लड़कियों की महिलाओ के लिए कोई सम्मान नहीं है। और उनके खुद के घर में तोमर दादियो के पति और उनके बड़े भाई साहब भी महिलाओ को दी जाने वाली आज़ादी के खिलाफ है उनके नज़र में महिलाये सिर्फ बच्चा पैदा करने घर का काम करने के लिए होती है।

कहानी सांड की आँख 


उत्तर प्रदेश के एक गांव में स्थित जगह बागपत गांव की  ये कहानी है। तोमर परिवार की बहू चंद्रो तोमर (भूमि पेडनेकर) और प्रकाशी तोमर (तापसी पन्नू) की, जो अपनी जिंदगी में घर का काम करने, खाना पकाने, अपने पति की सेवा करने, खेत जोने और भट्टी में काम करने के अलावा ज्यादा कुछ खास कर नहीं पाती। पर कुछ करने की इच्छा उनमे हमेशा होती है पर क्या करे ये समझ नहीं आता फिर एक दिन उनके गाँव में शूटिं रेंज लगता है जिसका कोच विनीत कुमार सिंह है, और वो बहोत अच्छा और पढ़ा लिखा इंसान है एक दिन दादिया उसके शूटिंग रेंज में पहुंच जाती है और शूटिंग सिखने का बोलती है उनकी लगन और जिद को देख कर कोच उनको ट्रेनिंग देता है, और वो फिर अपनी पोतियो को ट्रैन करती है ये सब घर  के मर्दो से छूप कर होता है गांव से बहार भी वो चारो प्रतियोगिता में भाग लेने जाते है और गोल्ड मैडल भी जीत जाते है पर क्या होगा जब ये बात उनके मर्द लोगो को पता चलेगी जानने  के लिए मूवी देखना पड़ेगा आप को।

एक्टिंग 


इस मूवी में चंद्रो दादी का रोले प्ले किया है  भूमि पेंडेकर ने और प्राकासी दादी का रोले प्ले कर रही है तापसी पन्नू और दोनों ने कमाल की एक्टिंग की है दोनों सच में गांव की महिलाये लगी भी है २ छोटी बच्ची जिन्होंने दादीओ की पोती का रोले किया है उनकी एक्टिंग भी जबरदस्त है और वो दोनों लड़किया बहोत क्यूट लगी है उन दोनों को देखना अच्छा लगता है। विनीत कुमार सिंह बुक्काबाज़ वाले लीड एक्टर वो इसमें शूटिंग कोच की भूमिका निभा रहे है और उन्होंने भी अपने काम को अच्छे से किया है और सबसे बढ़िया रोले है प्रकाश ज़ा का जो घर के मुखिया है उनकी एक्टिंग लाज़वाब है और वो अपनी अलग पहचान को छोर के जाते है।

क्या मेसेज देती है सांढ़ की आँख 


सपनें देखने कि कोई उमर नही होति कूछ कर गुजरने की चाहत हमेशा होति है, इन्सान मे बस इंतजार होता हें सहि टाइम का सही मोके का यही इस मूवी में बताया गया के अपने सपने को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जाओ पूरी दुनिआ के खिलाफ जाओ पर जब सपने पुरे होंगे सक्सेस आप के हाथो में होगी तो वही सब लोग आप के साथ होंगे।

क्या कमी रह गई मूवी सांड की आँख में 


मूवी कितनी भी अछि क्यों ना हो कुछ कमी तोह रही  ही जाती है। इस मूवी म सबसे खराब काम मेक अप आर्टिस्ट का है। ये आप को भी दिख जाएगा मूवी में जी हाँ दादियों के रोले में कई जगह पर दोनों एक्ट्रेस यंग लगी है। मतलब मेक उप को सीरियसली नही लिया है नि डायरेक्टर ने और ना ही मेक उप आर्टिस्ट ने इस पर ध्यान नही दिया।

ओवर आल कैसी है मूवी

मैं कोई मूवीज को दूसरी बार नही देख पाता बहोत कम ही ऐसी मूवीज बनती है जिसे हम और आप कई बार देख के भी बोर नहीं होते तो ये मूवी सांड की आँख भी उसी तरह की मूवी है जरूर देखनी चाहिए अपने पुरे परिवार के साथ देखि जा सकती है। बच्चों को जरूर देखनी चाहिए ये मूवी एंटरटेनमेंट के साथ पूरा मोटीवेट भी करती है हम सब को जरूर देखे  मैं इस फिल्म को देता हूँ 4 स्टार ।

प्रकाशी तोमर, भूमि पेडनेकर, shooter dadi, 

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